डॉक्टर की भूतिया कहानी हिंदी_ Achambhit Samadhan Horror Story Part 2
मैं एक डॉक्टर हूँ, मैं Paranormal और भूतों की बातों पर believe रखती थी, एक लडकी के साथ जो हुआ, उस के बारे में आज भी जब मैं सोच लेती हूँ तो मेरी रूह काँप जाती है,
चलिए मैं आपको बताती हूँ,
जब मैं होस्टल में अपनी डॉक्टरी की पढाई कर रही थी, तब मुझे ट्रैक से हट कर कुछ अजीब सी Paranormal किताबें पढने का शौक़ था, एक दिन दोपहर के लग भग ३ बज रहे थे, मैं सो रही थी लेकिन मुझे अचानक एक सपना दिखाई दिया, मैंने देखा कि मैं हॉस्टल की library में कुछ किताबे ढून्ढ रहीं हूँ तभी अचानक से एक पुरानी सी किताब मेरे सामने आ पडी, उसके ऊपर एक भूतिया फोटो बना हुआ था,
मैंने जैसे ही किताब को हाथ लगाया एक डरावने से चेहरे का आदमी काले घोडे पर बैठा हुआ मेरे पास आ रहा था
तभी अचानक से मेरी आँख खुल गई और मैंने ये सपना मेरी रूम पार्टनर रिनू को बताया वो मुझ पर हसने लगी,
मुझ से बोली पिंकी क्या तुम भी अनपढ लोगों की तरह भूतिया बातों पर billive करती हो,
मैंने कहा - हाँ भूत होते हैं, उनकी अपनी एक अलग ही दुनिया है, चाहे वो हमे दिखाई न दें ,
और मैंने बोला रिनू तुम मेरे साथ library चलोना हम उस तिया किताब को ढूँढते हैं
लेकिन वो तय्यार नहीं हुई,
अब मैं अकेले ही library पहुँच गई उस समय वहां कोई भी नहीं था, मैंने सपने में जो किताब देखी थी उसे मैं ढूँढने के कोशिश करने लगी, तभी मुझे वो किताब मिल गई और मैं उसे पढने लगी फिर वही डरावने से चेहरे वाला आदमी काले घोडे पर बैठा हुआ मुझे दिखाई दिया, वो मुझे अपनी डरावनी आँखों से घूर रहा था, मैं बहुत बुरी तरह डर गई और वहां से भागती हुई अपने रूम पर आ गई.
मैंने अपनी घबराहट और डर को कण्ट्रोल करते हुए उस किताब को पढना शुरू किया जैसे जैसे मैं वो भूतिया किताब पढते हुए आगे बढ रही थी, मैं भूतों की दुनिया के बारे में बहुत कुछ समझने लगी,
अब जब मैं उस किताब को पूरा पढ चुकी थी, मेरी दुनिया ही बदल गई, मुझे कुछ अजीब अजीब सी चीजे दिखाई देने लगी , अब मैं जब भी अकेली होती तो उस समय मुझे ऐसा लगता कि मैं अकेली नहीं हूँ
मेरे आसपास कोई तो है, किसी की परछाई और किसी के क़दमों की आहट मुझे सुनाई देती थी, मैंने ये बातें अपनी फ्रेंड्स को बताई तो वो मुझे पागल समझने लगीं
तब से मैंने इन बातों को लोगों को बताना छोड दिया_ अब जब मैं डॉक्टर बन चुकी तो बहुत दूर एक गाँव के गवर्मेंट हॉस्पिटल में मेरी जॉब लग गई_ ये गाँव नेपाल की बॉर्डर के पास था, हॉस्पिटल के आसपास ज़्यादा मकान नहीं थे,
वहां मेरे साथ डॉक्टर रवीन भी काम करते थे, वो एक बहुत ही brave आदमी थे,
रवीन से मेरी दोस्ती हो गई , कई बार जब रात को हम हॉस्पिटल में ड्यूटी कर रहे होते थे तो हम टहलने के लिए हॉस्पिटल से बाहर निकल आते, एक दिन जब आधी रात में हम बाहर टहल रहे थे तभी मुझे कुछ अजीब सी डरावनी आवाज़ सुनाई दी,
जैसे कि मुझ से कोई कुछ कहना चाह रहा हो.
मैं बोल पडी - रवीन तुमने कुछ सुना ?
रवीन बोला - नहीं ,
फिर मैं चुप हो गई, और मुझे लगा ये ज़रूर कोई paranormal जगह है, इस हॉस्पिटल के आस पास भूतों का साया है,
लेकिन ये सिर्फ मुझे ही क्यों महसूस होता है ?
ये मेरे लिए एक राज़ था , मैं समझ नहीं पा रही थी कि क्या ये मेरा वहम है या फिर ये इस लिए कि मैं भूतों की इन बातों पर बिलीव करती हूँ,
अब रवीन और हम कुछ दूसरी बाते करते हुए काफी दूर निकल गए, रात काफी हो चुकी थी अँधेरा गहरा हो गया था,
रविन कहने लगा - अरे हम तो काफी दूर आ गए, चलो अब वापस चलते हैं
हम जिस रास्ते से आये थे वापस उसी रास्ते पर चलते हुए होस्पिटल की तरफ बढने लगे,
लेकिन हमें ऐसा लगने लगा की हम रास्ता भटक गए हैं,
तभी अचानक से एक अजीब सा जानवर हमारे सामने से दौडता हुआ झाडियों में छुप गया,
अब तो रवीन भी डरने लगा, हम इधर उधर देखने लगे तभी अचानक से हमें सामने ही हॉस्पिटल दिखने लगा
और हम तेज़ी से क़दम बढाते हुए हॉस्पिटल पहुँच गए,
मुझे अब विश्वास हो चूका था कि ये सब भूतों का किया कराया है,
लेकिन डॉक्टर रवीन अब भी इन बातों पर billive नहीं कर रहे थे,
इस हॉस्पिटल में रात को सोने के लिए हमारे अपने अलग अलग रूम थे,
मैं अपने रूम में सोने के लिए आगई, लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी,
मैं लेटे लेटे इस डरावने हादसे के बारे में सोच रही थी,
मैं उस आवाज़ पर ध्यान दे रही थी जो मुझे वहां सुनाई दी थी, तभी मुझे अपने रूम की खिडकी के पास कोई खडा हुआ दिखाई दिया,
मैं चुपके से चलते हुए खिडकी के पास पहुँच गई और एक दम से खिडकी खोल दी,
लेकिन वहां कोई नहीं था_अब मैं वापस अपने bed पर आकर लेट गई और फिर पूरी रात बैचेनी के साथ भूतों के बारे में ही सोचती रही,
तभी सुबह हो चुकी थी डॉक्टर रवीन मेरे रूम में आगए
और मेरी तरफ देख कर बोल पडे - अरे तुम्हारी आँखे तो लाल हो रही हैं, लगता है कि तुम रात भर सो नहीं पाई हो,
मैंने कहाँ - हां रात भर ऐसे ही बैचेनी हो रही थी, पता नहीं क्यों मुझे नींद नहीं आ रही थी,
इसके बाद हम दोनों ने नाश्ता किया और फिर रवीन रूम से चला गया,
मैंने सोचा की मुझे दिन के उजाले में हॉस्पिटल से बाहर उसी रास्ते पर जाकर फिर से देखना चाहिए,
आखिर उस रात को हुआ क्या था_मैं ये सोच ही रही थी कि अचानक से हॉस्पिटल में एक emrgency केस आ गया,
रात को आदमियों के दो गुटों में झगडा हो गया था, लगभग दस लोग घायल थे.
डॉक्टर रवीन और मैंने इन सब लोगों का इलाज शुरू कर दिया_जिन लोगों को हल्की चोट आई थी उन्हें सिर्फ पट्टी बाँध कर छुट्टी दे दी गई और जो लोग ज़्यादा घायल थे उन्हें शहर के बडे हॉस्पिटल में रेफर कर दिया,
बाकी कुछ लोगों के opration हम दोनों ने ही किये,
इन सब कामों में मैं इतना Busy हो गई कि रात के १२ बज चुके थे
और मैं उस भूतिया रास्ते पर जाने का सोच भी नही पाई,
मैं अपने रूम में अपने बेड पर आकर लेट गई और लेटते ही मेरी नींद लग गई,
तभी मुझे किसी ने मेरे नाम के साथ आवाज़ दी पिंकी, पिंकी......
मैं चौंक कर उठ गई घडी में देखा रात के लग भग २ बज रहे थे_और दरवाज़े के पास किसी की परछाई दिखाई दे रही थी,
मुझे अब महसूस हो रहा था कि कोई मुझे कुछ बताना चाह रहा है_मैं उठी और उस आवाज़ के पीछे पीछे चलने लगी,
मैं जैसे ही आवाज़ के पास जाती, फिर आवाज़ कुछ और दूर से सुनाई देती और एक परछाई सी दिखाई देती,
मैं हॉस्पिटल से बाहर आ चुकी थी ,
मैं उसे रस्ते पर आचुकी थी जहाँ उस रात अचम्भित कर देने वाला हादसा हुआ था,
धीरे धीरे ये आवाज़ झाडियों से होते हुए, मुझे एक खंडहर सी पडी हवेली की तरफ से आने लगी,
अब मुझे वो हवेली एक भूतिया हवेली लग रही थी मैं डरने लगी और मैं ये सोच कर ज़्यादा डर गई की कहीं मेरे साथ कुछ गलत न हो जाये?
तभी सूरज निकल आया और मुझे अहसास हुआ कि मैं हॉस्पिटल से बहुत दूर गाँव की एक खंडहर पडी हवेली के सामने खडी हूँ_अब मैंने वापस हॉस्पिटल की तरफ जाने का सोचा, लेकिन मैं ये क्या देख रही हूँ? डॉक्टर रवीन अपने एक इंस्पेक्टर दोस्त के साथ मेरी तरफ आ रहे हैं.
रवीन बोला - पिंकी तुम्हे कुछ हुआ तो नहीं ?
एक नर्स ने बताया कि तुम आधी रात को अकेले हॉस्पिटल से बाहर निकल कर कहीं गई और फिर वापस नहीं आई
इसलिए हम तुम्हे ढूँढते हुए यहाँ तक पहुँच गए_अब मैंने रवीन और उनके इंस्पेक्टर दोस्त को पूरी बात बताई,
वो मेरी बातों को मेरा पागलपन और वहम समझ रहे थे,
मुझ से बोले चलो हॉस्पिटल चलते हैं. लेकिन मैंने उनसे रिक्वेस्ट करते हुए कहा कि एक बार ज़रूर इस हवेली को चेक किया जाये. कोई तो बात ज़रूर है, कोई हमें कुछ बताना चाह रहा है.
इंस्पेक्टर साहब ने मेरी बात मान ली, अब हम उस हवेली में दाखिल हुए, हवेली में एक बडा सा हॉल था और लगभग 5 कमरे थे, मुझे अचानक से एक परछाई एक कमरे की तरफ जाती हुई दिखाई दी,
मैं बोल पडी - इंस्पेक्टर साहब आपने कुछ देखा ? उस कमरे में अभी कोई तो गया है .
ये सुनने के बाद रवीन मेरी तरफ कुछ ऐसे देख रह था, कि जैसे मैं सच में पागल हो चुकी हूँ,
लेकिन अब इंस्पेक्टर साहब ने उस कमरे की तलाशी लेना शुरू की, उस कमरे के एक कोने पर एक दुपट्टा पडा हुआ दिखाई दिया,
दुपट्टा उठाने के लिए जैसे ही इंस्पेक्टर साहब आगे बढे उन्हें ज़मीन के नीचे ऐसी आवाज़ आई जैसे यहाँ कोई तल घर है,
इंस्पेक्टर साहब ने अपने साथ के दो पुलिस वालों से फर्श को खोदने के लिए कहा ,
जब फर्श को खोदा गया तो फिर नीचे एक तल घर की सीढियाँ दिखाई दीं, नीचे काफी अँधेरा था,
पुलिस वालों ने अपनी टोर्च निकाली, और फिर हम सीढियों से उतरते हुए तल घर में पहुँच गए,
जैसे ही हम अंदर पहुंचे हमें एक बडी बुरी बदबू आने लगी , जैसे ही torch से आगे की तरफ रौशनी की गई,
एक आदमी और एक लडकी की लाश दिखाई दी, लडकी का चेहरा देखते ही मुझे चक्कर आने लगे और मैं ज़मीन पर बैठ गई,
मुझे 1 month पहले एक patient की बात याद आने लगी, मैडम! आपने बडे अच्छे से इलाज किया है मेरा
मैं बोली - क्यों क्या इससे पहले वाले डॉक्टर अच्छे से इलाज नहीं करते थे ?
वो लडकी बोली - उन डॉक्टर साहब का दिमाग मेरे इलाज पर कम और दूसरी बातों पर ज़्यादा होता था,
और वो ये कहते हुए , मुस्कुराते हुए अंदाज़ के साथ बाहर चली गई,
अचानक से मुझे रवीन ने आवाज़ दी और मुझे फिर से होश आ गया,
रवीन बोला क्या हुआ, क्या तुम इस लडकी को जानती हो ?
मैं बोल पडी - हाँ अभी बीस दिन पहले ही मैंने इसका इलाज किया था, ये तो बडी भोली लडकी थी.
इसके बाद मैंने उस लडकी की लाश को गौर से देखा_उसके हाथ बंधे हुए थे और गर्दन को काटने की कोशिश की गई थी, बडी ही बुरी तरह से उसे मारा गया था और मारने के बाद उसकी लाश को इस तल घर में छुपा दिया गया, और ऊपर से फर्श को इस तरह ढांक दिया गया ताकि किसी को सालो साल इसका पता न चल सके और इस काम को करने के लिए भूतों की हवेली के नाम से बदनाम इस खंडहर पडी हवेली को चुना गया.
अब इंस्पेक्टर साहब ने एक पुलिस वाले को गाँव के लोगों को बुलाने के लिए भेज दिया और इन दोनों की लाशों को उपर लाकर एक कमरे में कपडा डाल कर रख दिया कुछ देर बाद हवेली के बाहर गाँव वाले जमा हो चुके थे,
हम सब बाहर चले गए और इंस्पेक्टर साहब ने उनसे पूछा, क्या आप में से किसी के घर से कोई आदमी गायब हुआ है ,
सब ने मना कर दिया, नहीं साहब गाँव से कोई गायब नहीं हुआ है अब इंस्पेक्टर साहब ने उन लाशों का चेहरा दिखाया, चेहरा देखते ही वहां मौजूद औरतें रोने लगीं, और लाशों के पास आ गईं, अब इंस्पेक्टर साहब को बहुत गुस्सा आया.
वो गुसे में बोल पडे - जब मैं तुम लोगों से पूछ रहा था, की गाँव से कोई गायब तो नहीं है ? तो तुम सब मना कर रहे थे जबकि इन कटी फटी लाशों को देखकर साफ़ पता चल रहा है कि लगभग ३० दिनों से ये यहाँ पडी हुई हैं ,
गांव वाले अब भी खामोश थे, वो ऐसा दिखा रहे थे जैसे उन्हें कुछ भी पता नहीं है,
लेकिन जब इंस्पेक्टर साहब ने उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी दी तो लडके की माँ रोते हुए बोल पडी -
साहब मेरा लडका इस लडकी से शादी करना चाहता था, लेकिन गाँव के कुछ बदमाश किस्म के आदमी उस लडकी को पसंद करने लगे थे,
जबकि लडकी के घर वाले मेरे बेटे से शादी करना चाहते थे, लेकिन बदमाशों ने धमकी दे रखी थी की अगर लडकी की शादी किसी और से की तो वो इसे जान से मार डालेंगे
इसलीये हम लोगों ने ही इन दोनों को रातों रात गांव छोड कर शहर जा कर शादी करने के लिए भेज दिया, लेकिन फिर क्या हुआ हमे नहीं पता .
फिर पुरे हादसे के बारे में पता ये चला की उसी रात इन बदमाशों ने इन दोनों को गांव से भागते हुए पकड लिया था,
और इस सुनसान भूतिया हवेली में लाकर उन्हें बडी बे दर्दी से मार दिया, इस हादसे के बाद पूरा गाँव सदमे में था, और मैं इस सोच में डूब गई की आखिर उस परछाई ने मुझे ही इस राज़ के बारे में क्यों बताया,
तो क्या जिन PARANORMAL किताबों को मैं पढ चुकी हूँ, उनकी बाते सच हैं, क्या भूतों की अपनी एक दुनिया है?
मैं इन अचम्भित सवालों का समाधान ज़रूर खोजूंगी.
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