भूतिया रास्ता एक डरावना सफर - Achambhit Samadhan Horror Story Part 1

 मैं एक ऐसी लडकी हूँ जो खुद को बडी brave girl समझती थी, सोशल मीडिया पर अपनी फोटो बडी बेफिक्री से शेयर करती थीं, मैं भूतों की कहानियों पर बिलकुल भी believe नहीं करती थी,

लेकिन उस दिन मेरे साथ जो हादसा हुआ उसके बारे में सोच कर आज भी मेरी रूह काँप जाती है,

सोशल मीडिया पर मेरी दोस्ती एक आदमी से हो गई, उसका नाम रवीन था, रवीन अपने पोस्ट में अक्सर भूतों की कहानी को डाला करता था, मैंने एक दिन उस पर कमेंट करदिया और कहा कि ये सब बकवास बातें हैं, मैं इनपर बिलकुल भी believe नहीं करती हूँ,

तब से हम एक दोस्त बन गए वो मेरे brave nature से बडा ही प्रभावित हुआ,

हम आपस में रोज़ घन्टों बातें करने लगे, मुझे उससे  लगाव सा होने लगा,

एक दिन की बात है उसने मुझसे अपने गाँव आने के लिए कहा, मैं चूँकि एक बिंदास लडकी थी इसलिए मैंने उससे मिलने का मन बना लिया.

मैं अकेले ही ट्रेन से इस सफर पर निकल गई, अब जब लज्जो पुर गाँव के स्टेशन पर ट्रेन रुकी तो उस समय रात के लग भग ३ बज रहे थे ,

मैं ट्रेन से उतरी तो मैंने देखा पूरा स्टेशन खाली पडा है और मैं अकेले ही ट्रेन से उतरी हूँ ,

रवीन को मुझे लेने के लिए स्टेशन पर मौजूद होना चाहिए था, लेकिन वो मुझे लेने नहीं आया मैंने अपना सेल फोन निकाला और उसे कॉल किया लेकिन उसका सेल फ़ोन Switch off आ रहा था,

अब मैंने अकेले ही उस के घर तक जाने का सोचा और मैं गाँव की एक सडक पर चल पडी,

चूँकि मैं नाही मर्दों से डरती थी और नाही भूतों से इसलिए मैं अकेले ही सडक पर चले जा रही थी,

रात के सन्नाटे में कुत्तों के रोने की आवाज़ सुनाई देने लगी, हां मैं कभी इतनी रात को घर से बाहर नहीं निकली थी, 

मुझे ऐसा लग रहा था कि कुत्तों के रोने की आवाज़ मैंने पहली बार सुनी है, वो आवाज़ सच में डरावनी थी, और झाडियों से गुजरते हुए हवा की सायं सायं करती आवाज़ से मुझे सच में डर लगने लगा था, मैंने अपने डर पर काबू पाने की पूरी कोशिश की 

और फिर कुछ दूर पैदल चलने के बाद मुझे दूर से घोडे के हिन् हिनाने की आवाज़ सुनाई दी और ऐसा लगा कि कोई घोडे पर बैठ कर मेरी तरफ आ रहा है,

मुझे रवीन  ने बताया था की उसके पास एक काला घोडा भी है, अब मुझे पक्का यकीन हो गया कि रवीन मुझे लेने आ गया है,

लेकिन तभी मैंने देखा कोई औरत है जो मेरे सामने खडी  है, मुझे घूर कर देख रही है, अब मैं सच में पहली बार डर चुकी थी,

मैंने घबराते हुए उससे पूछा - कौन हो तुम ?

उसने कहा - मैं मंज्जो हूँ,  मुझे रवीन ने भेजा है, मैं तुम्हे उसके घर तक छोड दूंगी तुम मेरे साथ चलो,

मैंने उससे कहा - कि क्या पैदल चलना होगा? तभी वो हसने लगी, उसकी हसी बडी डरावनी थी ,

वो बोल पडी - गाँव में हम लोगो की पैदल ही चलने की आदत होती है,

अब मैं उसके साथ चल पडी, रस्ते में एक नदी दिखाई दी, नदी के चारों तरफ अँधेरा छाया हुआ था,

नदी के बीच में से एक रास्ता जा रहा था जो बहुत ही पतला सा रास्ता था,

 मंजो बोल पडी - तुम्हें तैरना याद है ?

मैंने बोला - नहीं, 

ये सुनकर वो फिर खौफनाक तरीके से हसने लगी,

उसने बोला - चलो मेरा हाथ पकड लो, 

अब अँधेरी रात में मुझे रास्ता भी ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था तब मैंने उसका हाथ पकड  लिया,

जैसे ही मैंने उसका हाथ पकडा मुझे कुछ अजीब सा लगा, ऐसा लगा जैसे मैंने किसी मुर्दा इनसान का हाथ पकड लिया हो,

उसका हाथ बिलकुल बर्फ की तरह ठंडा पडा हुआ था,

उसने मेरे हाथ को ज़ोर से दबा कर पकड लिया और हम तेज़ तेज़ कदमों से नदी को पार करने लगे तभी सामने से, कुछ रौशनी दिखाई दे रही थी,

जैसे जैसे हम उसके पास पहुंचने लगे तो मैंने देखा एक काली बिल्ली मुझे घूर रही है, मैं रुक गई 

मंजो मुझ से बोली क्या हुआ ? तुम इससे डर गई , ये तो सिर्फ छलावा है, सच में कोई बिल्ली नहीं है

अब ये बात सुनकर मुझे उस औरत से ही डर लगने लगा था,

मंजो मुझे खींचती हुई उस बिल्ली की तरफ ले जा रही थी तभी अचानक से काली बिल्ली ग़ायब हो गई,

अब हम नदी पार कर चुके थे और ऊँची ऊँची झाडियों से गुजर रहे थे,

तभी झाडियों के बीच कुछ लोगों की धीरे धीरे बातें करने की आवाज़ सुनाई दी,

ये आवाज़ भी औरतों की लग रही थी, तभी अचानक से मंजो का हाथ मेरे हाथ से छूट गया, मैं उसे अँधेरे में  नहीं देख पा रही थी,

जो आवाज़ धीरे धीरे आ रही थी वो तेज़ होने लगी, मैंने ध्यान से सुना तो एक आवाज़ मंजो की थी, ऐसा लग रहा था मंजो किसी से झगड रही है,

अब मुझे पसीने छूटने लगे, मैं तो सच में डर रही थी,

मैंने आवाज़ दी , मंजो, मंजो तुम कहाँ हो, तभी मुझे कुछ ऐसी आवाज़ सुनाई दी जैसे ज़ोर से कोई जमीन पर गिरा हो, मैंने फिर पुकारा मंजो, मंजो अब मुझे  फिर वही आवाज़ सुनाई दी,

अब मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मंजो किसी से झगड रही है, मेरा हलक पानी की प्यास से सूख रहा था, और मैं चुप चाप अपने कानों को दबा कर खडी हो गई 

तभी एक ज़ोरदार आवाज़ सुनाई दी, मंजो भाग जा यहाँ से,

और फिर अचानक से एक दूसरी औरत मेरे सामने आ गई बोली मैडम चलिए रवीन के पास मैं आपको लेकर जाउंगी मैं उन्ही के साथ काम करती हूँ, वो मेरे बोस हैं 

मैंने कहा मंजो कहाँ है वो औरत बोली वो एक भूतनी चुडैल थी, मैंने उसे भगा दिया है, अब कोई खतरा नहीं,

ये सुनना था की बस मानो मेरी जान ही निकलने वाली थी, 

मुझे वो बातें याद आ रही थी जिस पर मैं लोगों से बहस किया करती थीं कि भूत वूत नहीं होते हैं,

मैं कुछ भी समझ नहीं पा रही थी की मैं क्या करूँ , अब वो औरत मुझ से कहने लगी कि मैं रेनू हूँ , तुम मेरे साथ मेरे पीछे पीछे चलती रहो,

मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं ज़ोर ज़ोर से चीखुं, चिल्लाऊं किसी से हेल्प मांगू, 


लेकिन इस सुनसान रास्ते पर कोई मेरी सुनने वाला नहीं था, अब मैं इस औरत के पीछे पीछे चलने लगी,

उसने मुझे एक रस्सी पकडा दी और मैं अँधेरे में उस रस्सी को पकडते हुए उसके पीछे पीछे चल रही थी 

कुछ दूर चलने के बाद मुझे कहीं से कुछ धुंवा धुवां से दिखाई देने लगा,

अब मैं क्या देखती हूँ कि हम एक शमशान घाट से गुज़र रहे हैं, तभी मुझे ऐसा लगा कि जिस रस्सी को मैंने पकडा हुआ है वो जैसे किसी परछाई के हाथ में है,

मैंने आवाज़ दी रेनू, रेनू तुम कहाँ हो, तभी रेनू बोली मैडम घबराइए मत मैं आपके सामने ही हूँ, लेकिन मेरे सामने सिर्फ एक परछाई ही थी,

अब मेरे कदम लड खडा ने लगे , मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मुझ में जान ही न हो, 

शमशान घाट में आधी रात को लोगों की बातें करने की आवाज़ और कुछ लोगों की हंसने की आवाज़ सुनकर मेरी जान निकल रही थी,

अब मैंने फैसला कर लिया था कि मुझे यहाँ से भाग जाना चाहिए, और तभी मैंने स्टेशन की तरफ दौड लगाने की कोशिश की लेकिन जैसे ही मैं दौडी, मैं  गिर गई,

अब शमशान में से किसी की आवाज़ आई (डरावनी आवाज़ में ) पकडो इसे, इससे पहले कि इसका खून ठंडा पड जाये हमे इसका खून चूस लेना चाहिए,

किसी ने चिल्ला कर कहा - रेनू तुम इसे पकडती क्यों नहीं हो?

 रेनू बोल पडी - इसके पास एक चाकू है, इसीलिए मैं इस पर अबतक हावी नहीं हो पाई वरना मैं इसे रास्ते में ही खत्म कर देती,

इसलिए हम इसे सिर्फ डरा कर ही मार सकते हैं, अभी ये बाते कर ही रहे थे कि मुझे फिर घोडे के हिन् हिनाने की आवाज़ आई,

ये वही आवाज़ थी जिसके बाद मुझे मंजो मिली थी, और ये लोग भी बाते कर रहे थे कि मंजो आ रही है, 

और मेरे सामने मंजो खडी थी, वो बोल पडी - जल्दी से मेरा हाथ पकडो और चलो यहाँ से ,

मुझे उसकी आवाज़ में अपनापन महसूस हुआ और मैंने उसका हाथ पकड लिया और हम दोनों दौडते हुए शमशान घाट से बाहर निकल आये,

अब मैं मंजो के साथ एक बडे से मैदान में खडी थी, रात के सन्नाटे में, सायं सायं करती हवा की आवाज़ और झाडियों के हिलने का नज़ारा काफी डरावना सा था

मंजू मुझे एक गड्डे के पास ले गई और किसी को आवाज़ देने लगी रुन्जन रुन्जन बाहर आओ,

मैं डरते हुए बोली, अब ये रुन्जन कौन है और हम इस गड्डे के पास क्या कर रहे हैं?

मंजो बोल पडी - रुन्जन मेरा पति है, मैंने जब रेनू को मार दिया था तब उसके भाई ने मुझे और रुन्जन को धोके से मार डाला था और इस मैदान में दफन कर दिया था, 

ये सुनना था कि मेरी चीख निकल गई और मैं चिल्लाकर बोल पडी - तो क्या तुम सच में एक भूत हो ?

मंजो बोली हाँ, और मैं तुम्हे अपने पति के लिए लाइ हूँ,  मैं अपने पति से बहुत ही प्यार करती हूँ , 

उन्होंने काफी दिनों से किसी इंसान का खून नहीं पिया है आज हम दोनों तुम्हारा खून पियेंगे, 

तभी एक परछाई मुझे दिखाई देती है, और और मंजो उसे देख कर बोल पडी - कहाँ चले गए थे रुन्जन तुम ?

ये लो आज मैं तुम्हारे लिए एक मज़ेदार खाना लाइ हूँ ये के बडी हट्टी कट्टी औरत है इसका खून पीने में तुम्हे बडा ही मज़ा आयेगा, 

ये कह कर वो दोनों मेरी तरफ बढने लगे इतने में सुबह के 5 बज चुके थे और अँधेरा ख़त्म हो रहा था अब मुझे इन दोनों का चेहरा दिखाई देने लगा मैं इनका भयानक चेहरा देख कर जमीन पर गिर गई 

अब जब मेरी आँख खुली तो मैंने देखा कि मैं  किसी के घर में पलंग पर लेटी हूँ, जैसे ही मैं घबरा कर उठी, रवीन मेरे सामने आ गया.

रवीन  बोल पडा - तुम अब कैसी हो ?

मैंने कहा मुझे क्या हो गया था ? , रवीन बोला तुम मुझे रेलवे स्टेशन पर बेहोश पडी हुई मिली थी,

ये सुनने के बाद मैंने रवीन को रात की पूरी बात बताई, ये सुनने के बाद रवीन बोला तो तुम अब क्या कहती हो भूत वूत होते हैं या नहीं ?

मैंने थोडा सोच कर जवाब दिया मैं साइंस पर बिलीव करती हूँ, भूतों पर नहीं, 

और फिर हम दोनों ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे.

(Disclaimer- ये मात्र एक काल्पनिक कहानी है जो सिर्फ मनोरंजन के उद्देश्य से लिखी गई है, इसे गंभीरता से न लें ) 

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